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बाड़मेर में साइकिल पंचर बनाने वाले के बेटे की नीट में ऑल इंडिया 638वीं रैंक, जानिए संघर्ष की कहानी

अगर मेहनत, दृढ इच्छाशक्ति और दृढ संकल्प हो तो कुछ भी मुश्किल नहीं है। ऐसे मजबूत इरादों से सपनों को पूरा करने के लिए धन की कमी आड़े नहीं आती।

जितेंद्र कुमार का संघर्ष ऐसा ही कुछ बाड़मेर जिले के सिवाना के जितेंद्र कुमार ने किया है. जबकि उनके पिता साइकिल पंचर की दुकान चलाते हैं। दरअसल जितेंद्र कुमार ने अपनी मेहनत और लगन से नीट की परीक्षा पास की है। एक साधारण परिवार के इस छात्र को महंगी कोचिंग और बड़े क्लासरूम नहीं मिलते थे। इसके बावजूद देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक NEET ने पास कर ली है।

बाड़मेर के एक छोटे से गांव सिवाना निवासी पानाराम कस्बे के गांधी चौक के पास टायर पंक्चर डंप है. एक दिन में मुश्किल से 300 से 400 रुपये की आमदनी होती है। इस आय से वह परिवार के पांच सदस्यों का भरण पोषण करता है। लेकिन घर के विकट हालात में बेटे जितेंद्र कुमार ने बिना किसी कोचिंग के NEET की परीक्षा पास कर ली है.

जितेंद्र को मिली 638वीं रैंक जितेंद्र कुमार की ऑल इंडिया रैंक 32861 रैंक है जबकि एससी कैटेगरी में यह 638वीं रैंक है जितेंद्र ने बताया कि कितनी भी मुश्किलें क्यों न हों लेकिन हिम्मत से सभी को दूर किया जा सकता है।

माँ का संघर्ष जितेंद्र की मां फौ देवी भी घर में कशीदाकारी कर परिवार चलाने में मदद करती हैं। हालांकि, जितेंद्र के पिता को इस बात का मलाल है कि वह अपने बच्चे को महंगे कोचिंग सेंटर में नहीं भेज सके। लेकिन उन्हें इस बात की खुशी है कि इसके बावजूद उनके बेटे ने कामयाबी का झंडा बुलंद किया है. जितेंद्र की कड़ी मेहनत के बाद अब उनके अंकों के आधार पर उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज में आराम से प्रवेश मिलेगा।

जहां जितेंद्र एक छोटे से शहर में पोषित अपने बड़े सपने को साकार करेंगे।

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